बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी  क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी

जुनूँ वही है वही मैं मगर है शहर नया  यहाँ भी शोर मचा लूँ अगर इजाज़त हो

मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता कुछ रिश्तो का कोई तोल नहीं होता वैसे तो लोग कई मिलते है हमे पर कोई आपकी तरह अनमोल नहीं होता.!

छोड़ना है तो न इल्ज़ाम लगा कर छोड़ो कहीं मिल जाओ तो फिर लुत्फ़ -ए -मुलाक़ात रहे

गुलाब जिस्म का यूँ ही नहीं खिला होगा हवा ने पहले तुझे फिर मुझे छुआ होगा

कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत मेरी  लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी

लोग इश्क़ में कैसी लब से लब मिला लेते हैं,  हमारी तो उनसे नज़रें मिल जाएं तो होश नहीं रहता

इरादा दोस्ती का था लेकिन मोहब्बत हो गई आपसे।